Workshop by Nidaan Group

बालकों की परवरिश उनके जीवन को सही आयाम देती है जिससे वह अपनी असीम क्षमताओं से रूबरू होकर अपने लक्ष्य को पाने हेतु प्रयास करता है । यदि परवरिश सही दिशा में की जाए तो वह अपने भविष्य में असीम ऊँचाइयों को छू सकता है । वास्तव में बालक की परवरिश का संपूर्ण उत्तरदायित्व उसके परिवार उसके माता-पिता का होता है और विद्यालय वह पायदान है जहाँ उसका मार्गदर्शन कर उसकी क्षमता को उन्नत करने का प्रयास किया जाता है । हर बच्चा अपने आप में अद्भुत और अलग होता है । न केवल उनकी शारीरिक रचना में भिन्नता होती है वरन उनका सामाजिक और मानसिक विकास भी अलग होता है । प्रत्येक बच्चे की आवश्यकता उसकी पढ़ने लिखने बोलने की क्षमता आदि कार्य एक दूसरे से भिन्न होते हैं । सामान्यतः बच्चे कक्षा कक्ष में असामान्य व्यवहार, कमजोर स्मृति, अक्षरों को उल्टा लिखना, आत्मविश्वास की कमी, छोटी-छोटी बात पर निराश होना, अन्य विद्यार्थियों की तुलना में धीमी गति से पढ़ना लिखना, बोर्ड से त्रुटिपूर्ण उतारना, सामाजिक कौशल की कमी जैसी समस्याओं से जूझते हुए दिखाई देते हैं । प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और उनकी भिन्नता को समानता में परिवर्तित करने उनके व्यवहार और पढ़ाई से संबंधित चिंताओं के निदान पर मंथन हेतु स्टैंडर्ड पब्लिक स्कूल प्रांगण में अभिभावकों हेतु देश की सुप्रसिद्ध चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट श्रीमती कला मोहन मेडम के आतिथ्य में विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ विद्यालय परंपरा के अनुरूप विधिवत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ विद्यालय प्रबंधक महोदय श्री वासुदेव मंगारामानी सर, श्री जितेंद्र डोडेजा सर, विद्यालय के प्राचार्य महोदय श्री श्याम अग्रवाल सर और उप प्राचार्य महोदया श्रीमती मोमिता चटर्जी मेडम की उपस्थिति में हुआ। कार्यक्रम को तीन वर्गों में विभक्त किया गया। जिसमें पहला वर्ग नर्सरी से सीनियर केजी, दूसरा कक्षा पहली और दूसरी तथा तीसरा कक्षा तीसरी से पांचवी कक्षा के बालकों के अभिभावकों हेतु रखा गया उद्देश्य था -पारिवारिक परवरिश के दौरान बालकों की भिन्नता का परीक्षण कर उचित दिशा प्रदान करने हेतु अभिभावकों का मार्गदर्शन करना ।कार्यशाला के अंतर्गत श्रीमती मोहन मेडम द्वारा बालक की व्यवस्थित परवरिश और सर्वांगीण विकास के विभिन्न आयामों पर चर्चा की गई। साथ ही वर्तमान समय पर माता पिता की वर्तमान स्थिति को कटाक्ष करते हुए कहा कि आज प्रीमेच्योर बेबी से अधिक प्रीमेच्योर पेरेंटिंग दिखाई देती है। आज माता पिता बनने का अर्थ केवल बालक को जन्म देने तक सीमित हो गया है । माता पिता की सही परिभाषा व्यक्ति भूलता जा रहा है ।बच्चों को संस्कार देने की जिम्मेदारी भी आज विद्यालयों पर थोप दी जाती है आज एकल होते परिवारों की बढ़ती तादादऔर स्टेटस सिंबल के कारण बच्चों की अच्छी परवरिश की उपेक्षा की जाती है जबकि गर्भ से लेकर बच्चा 18 वर्ष की उम्र तक माता पिता के आचार विचार व्यवहार से सीखता है। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा किस प्रकार गलत खान-पान , परिवार के सदस्यों का अभद्र व्यवहार और एकाकीपन बच्चे के विकास में बाधक बनता है। यही कारण है कि आज बच्चे संस्कार हीन होकर अपनत्व खोते जा रहे हैं ।बच्चे के सही व्यक्तित्व,उसके विकास के लिए माता पिता को संयुक्त परिवार के योगदान को समझना चाहिए । आज पालक को चाहिए कि वे सर्वप्रथम स्वयं को सोशल मीडिया से दूर रख कर अधिक से अधिक समय अपने बालकों के साथ बिताएँ। साथ ही अपने बच्चों की टीवी मोबाइल से दूरी बनवाएँ ।उन्हें पर्यावरण ,जातक कथाओं ,जानी-मानी हस्तियों की पुस्तकों से मित्रता करने की शिक्षा दें । अभिभावकों को बताते हुए उन्होंने कहा किस प्रकार दैनिक कार्यों से बालकों की मोटर स्किल को निखारा जा सकता है और और उन्हें सही दिशा प्रदान करते हुए उनके व्यक्तित्व का उचित विकास किया जा सकता है । कार्यक्रम का आभार विद्यालय परिवार की शिक्षिका श्रीमती माणिक पुंडलिक मेडम द्वारा किया गया । इस चिंतनीय विषय पर किए गए प्रयास को सभी अभिभावकों द्वारा सराहा गया ।

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